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पुस्तकालय
ज्ञान सबको व्यापक रूप से सुलभ कराने में पुस्तकालयों की भूमिका पर किसी को कोई संदेह नहीं है। आज के संदर्भ में पुस्तकालय दो अलग-अलग भूमिकाएँ निभा सकते हैं। वे सूचना और ज्ञान के स्थानीय केन्द्र बन सकते हैं और राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय ज्ञान के स्थानीय प्रवेश द्वार बन सकते हैं। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मौजूदा पुस्तकालयों को अपनी पुस्तक संग्रह, सेवाओं और सुविधाओं को आधुनिक बनाना होगा, खुद बढ़-चढ़कर काम करना होगा, दूसरी संस्थाओं, एजेंसियों और गैरसरकारी संगठनों के साथ मिलकर काम करना होगा ताकि समुदाय आधारित सूचना प्रणाली विकसित की जा सके।
राष्ट्रीय ज्ञान आयोग निम्नलिखित कुछ विषयों पर विचार कर रहा है:
- पुस्तकालयों के लिए संस्थागत ढाँचा;
- नेटवर्किंग;
- शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान;
- पुस्तकालयों को आधुनिक बनाना और उनमें कम्प्यूटर का इस्तेमाल;
- निजी और व्यक्तिगत संग्रहों का संरक्षण;
- बदलती ज़रूरतों को पूरा करने के लिए कर्मचारियों की आवश्यकता।
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