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कानूनी शिक्षा
कानून की शिक्षा पेशेवर शिक्षा का एक ऐसा पहलू है, जो न सिर्फ समाज में कानून के ऐतिहासिक उपयोगिता की दृष्टि से, बल्कि भूमंडलीकरण के मौजूदा संदर्भ में भी बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। कानून की शिक्षा ज्ञान के सिध्दांतों की रचना करने और उन्हें उन सिध्दांतों को समाज में अपनाने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। शिक्षा, मुकदमेबाजी, कंपनियों की क्रियाविधियों, सरकार और समाज में प्रशिक्षित कानूनी जानकारों की आवश्यकता पिछले कुछ वर्षों में बहुत अधिक बढ़ गई है और ऐसा अनुमान है कि आने वाले वर्षों में कानून के जानकार प्रशिक्षित व्यक्तियों की माँग बेहिसाब बढ़ेगी। अत: भारत में कानून की शिक्षा के बारे में एक स्पष्ट दीर्घकालिक नीति बनाना बहुत आवश्यक है। इस नीति में लगातार उत्कृष्टता बनाए रखने पर ध्यान देना होगा।
राष्ट्रीय ज्ञान आयोग कानून की शिक्षा के मामले में जाने-माने कानूनविदों और शिक्षाविदों के साथ सलाह-मशविरा कर रहा है। उसके कुछ प्रमुख विषयों पर विचार कर रहा है:
- कानून की उत्तम शिक्षा सुलभ कराना;
- प्रतिभावान शिक्षकों को आकर्षित करना और उन्हें कानूनी शिक्षा संस्थानों में बने रहने के लिए प्रेरित करना;
- पाठयक्रम को निरंतर विकसित करने के तरीकों की पहचान करना;
- बुनियादी सुविधाओं और प्रशासनिक मसलों के अभिनव समाधान तलाश करना;
- विनियमन से जुड़े मुद्दे;
- दुनिया की स्पर्धा में टक्कर लेने लायक गंभीर शोध परंपरा विकसित करना;
- कानून का लगातार प्रशिक्षण लेने के ऐसे तौर-तरीके विकसित करना, जो समाज में अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों की ज़रूरतें पूरी कर सके।
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