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एनकेसी परामर्शदाता - स्वास्थ्य सूचना नेटवर्क
कार्यदल के सदस्य इस प्रकार हैं:
- डा. एन.के. गांगुली
अध्यक्ष, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद
- डा. बी.एस. बेदी
सलाहकार, सीडीएसी एंड मीडिया लैब एशिया,
पूर्व वरिष्ठ निदेशक एवम् विभागाध्यक्ष मेड. इलैक्ट्रॅेनिक्स एंड टेलिमेडिसिन,
सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार
- श्री पार्थ चट्टोपध्याय
सीडी (डीआरएस), स्वास्थ्य एवम् परिवार कल्याण मंत्रालय
- डा. शिबन गंजू
संयोजक, आई-हिंद
- डा. शिव कुमार
सदस्य, राष्ट्रीय सलाहकार परिषद
- डा. रामाकृष्णन
महानिदेशक, सी-डेक
- प्रो. के. श्रीनाथ रेड्डी
अध्यक्ष ,पब्लिक हेल्थ फाऊंडेशन ऑफ इंडिया
- श्री राजदीप सहरावत
उपाध्यक्ष, नेस्काम
- श्री राज शाह
सीईओ, कैपिटल टैक्नॉलॉजी इंफोर्मेशन सर्विसेस (सीटीआईएस)
- श्री डा. वाई.के. शर्मा
उप महानिदेशक, एनआईसी
विचारणीय विषय:
- भारत में जनस्वास्थ्य,स्वास्थ्य अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवा डिलीवरी व्यवस्था सुधारने के लिए एक से दूसरे सिरे तक कारगर स्वास्थ्य सेवा इंफॉर्मेटिक्स नेटवर्क फ्रेमवर्क का डिजाइन,विकास और समन्वय करना।
- भारतीय स्वास्थ्य सूचना नेटवर्क के सभी स्तरों (बुनियादी ढाँचा,लेन-देन,वेयरहाउसिंग और वेब सर्विसेज़) का ढाँचा और डिजाइन तैयार करना।
- जनस्वास्थ्य,स्वास्थ्य अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवा डिलीवरी व्यवस्था को सहारा देने के लिए आवश्यक प्रणालियों को परिभाषित करना।
- भारत के लिए आवश्यक मानक तय करना और अंतर्राष्ट्रीय मानकों का पालन करना तथा उन पर अमल कराना।
- लीगेसी सिस्टम्स,एंटरप्राइज़ सिस्टम्स और ग्लोबल सिस्टम्स को एक से दूसरे सिरे तक अपनाने और उनके बीच तालमेल बैठाना के ढाँचे के लिए ज़रूरी शर्तों की पहचान करना।
- स्वास्थ्य सेवा व्यवस्थाओं के विकास और संचालन के लिए मानक आधारित खुले स्रोत,खुले ढाँचे,साधनों और आवश्यक सुविधाओं की स्थापना करना।
- सभी मंचों और माध्यमों के बीच प्रणालियों को आपस में अपनाई जाने की व्यवस्था करना।
- गोपनीयता और सुरक्षा के मुद्दों का आकलन करना और उनके पालन के लिए दिशानिर्देश तय करना।
- स्वास्थ्य सेवा से जुड़े सभी पक्षों के लिए प्रमाणीकरण और मान्यता देने की प्रक्रिया के तरीके विकसित करना।
- पूरे ढाँचे को मान्यता देने के लिए तेज़ी से अपनाए जा सकने वाले नमूने और पायलट विकसित करना।
- किसी भी प्रणाली की विशेषताओं और संचालन की सुविधा का आकलन करने की शर्ते तय करना।
- कार्यक्रम पर अमल करने की योजना बनाना।
- निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की गतिविधियों और उनसे जुड़ी भूमिकाओं और ज़िम्मेदारियों में तालमेल रखने के लिए कारोबारी और वित्तीय मॉडल तैयार करना।
- सँभावित खतरों की पहचान करना और उनसे निपटने के उपायों का सुझाव देना।
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