राष्ट्रीय ज्ञान आयोग
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राष्ट्र के नाम प्रतिवेदन 2006 - 2009

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एनकेसी परामर्श | कार्यदल

एनकेसी परामर्शदाता - स्वास्थ्य सूचना नेटवर्क

कार्यदल के सदस्य इस प्रकार हैं:

  1. डा. एन.के. गांगुली
    अध्यक्ष, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद

  2. डा. बी.एस. बेदी
    सलाहकार, सीडीएसी एंड मीडिया लैब एशिया,
    पूर्व वरिष्ठ निदेशक एवम् विभागाध्यक्ष मेड. इलैक्ट्रॅेनिक्स एंड टेलिमेडिसिन,
    सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार

  3. श्री पार्थ चट्टोपध्याय
    सीडी (डीआरएस), स्वास्थ्य एवम् परिवार कल्याण मंत्रालय

  4. डा. शिबन गंजू
    संयोजक, आई-हिंद

  5. डा. शिव कुमार
    सदस्य, राष्ट्रीय सलाहकार परिषद

  6. डा. रामाकृष्णन
    महानिदेशक, सी-डेक

  7. प्रो. के. श्रीनाथ रेड्डी
    अध्यक्ष ,पब्लिक हेल्थ फाऊंडेशन ऑफ इंडिया

  8. श्री राजदीप सहरावत
    उपाध्यक्ष, नेस्काम

  9. श्री राज शाह
    सीईओ, कैपिटल टैक्नॉलॉजी इंफोर्मेशन सर्विसेस  (सीटीआईएस)

  10. श्री डा. वाई.के. शर्मा
    उप महानिदेशक, एनआईसी

विचारणीय विषय:
  1. भारत में जनस्वास्थ्य,स्वास्थ्य अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवा डिलीवरी व्यवस्था सुधारने के लिए एक से दूसरे सिरे तक कारगर स्वास्थ्य सेवा इंफॉर्मेटिक्स नेटवर्क फ्रेमवर्क का डिजाइन,विकास और समन्वय करना।
  2. भारतीय स्वास्थ्य सूचना नेटवर्क के सभी स्तरों (बुनियादी ढाँचा,लेन-देन,वेयरहाउसिंग और वेब सर्विसेज़) का ढाँचा और डिजाइन तैयार करना।
  3. जनस्वास्थ्य,स्वास्थ्य अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवा डिलीवरी व्यवस्था को सहारा देने के लिए आवश्यक प्रणालियों को परिभाषित करना।
  4. भारत के लिए आवश्यक मानक तय करना और अंतर्राष्ट्रीय मानकों का पालन करना तथा उन पर अमल कराना।
  5. लीगेसी सिस्टम्स,एंटरप्राइज़ सिस्टम्स और ग्लोबल सिस्टम्स को एक से दूसरे सिरे तक अपनाने और उनके बीच तालमेल बैठाना के ढाँचे के लिए ज़रूरी शर्तों की पहचान करना।
  6. स्वास्थ्य सेवा व्यवस्थाओं के विकास और संचालन के लिए मानक आधारित खुले स्रोत,खुले ढाँचे,साधनों और आवश्यक सुविधाओं की स्थापना करना।
  7. सभी मंचों और माध्यमों के बीच प्रणालियों को आपस में अपनाई जाने की व्यवस्था करना।
  8. गोपनीयता और सुरक्षा के मुद्दों का आकलन करना और उनके पालन के लिए दिशानिर्देश तय करना।
  9. स्वास्थ्य सेवा से जुड़े सभी पक्षों के लिए प्रमाणीकरण और मान्यता देने की प्रक्रिया के तरीके विकसित करना।
  10. पूरे ढाँचे को मान्यता देने के लिए तेज़ी से अपनाए जा सकने वाले नमूने और पायलट विकसित करना।
  11. किसी भी प्रणाली की विशेषताओं और संचालन की सुविधा का आकलन करने की शर्ते तय करना।
  12. कार्यक्रम पर अमल करने की योजना बनाना।
  13. निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की गतिविधियों और उनसे जुड़ी भूमिकाओं और ज़िम्मेदारियों में तालमेल रखने के लिए कारोबारी और वित्तीय मॉडल तैयार करना।
  14. सँभावित खतरों की पहचान करना और उनसे निपटने के उपायों का सुझाव देना।