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संगठन

राष्ट्रीय ज्ञान आयोग में अध्यक्ष सहित छह सदस्य हैं। सभी सदस्य अंशकालिक रूप में अपना काम करेंगे और इसके लिए कोई पारिश्रमिक नहीं लेंगे।
सदस्यों के काम में उनकी मदद के लिए थोड़े से तकनीकी कर्मचारी हैं, जिनका नेतृत्वसरकार द्वारा राष्ट्रीय ज्ञान आयोग में प्रतिनियुक्त कार्यकारी निदेशक करते हैं। आयोग अपने कामों के प्रबंध में सहायता के लिए किसी भी विशेषज्ञ की सेवाएँ ले सकता है।
नियोजन और बजट के साथ-साथ संसद संबंधी प्रतिक्रियाओं को सँभालने के लिए राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की नोडल (केन्द्रीय) एजेंसी योजना आयोग को बनाया गया है।
राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की कार्य विधि:
- ध्यान देने के मुख्य क्षेत्रों की पहचान
- विविध हितधारकों की पहचान और क्षेत्रों के मुख्य विषयों की समझ
- कार्यदलों का गठन और कार्यशालाओं/गोष्ठियों का आयोजन, संबध्द ईकाइयों और हितधारकों के साथ विस्तृत औपचारिक और अनौपचारिक विचार-विमर्श
- प्रशासनिक मंत्रालयों तथा योजना आयोग के साथ विचार-विमर्श
- राष्ट्रीय ज्ञान आयोग के अध्यक्ष की ओर से प्रधानमंत्री के नाम पत्र में भेजे जाने वाली सिफारिशें तय करने पर राष्ट्रीय ज्ञान आयोग में चर्चा
- प्रधानमंत्री के नाम पत्र, जिसमें मुख्य सिफारिशें, शुरूआती उपायों, वित्तीय ज़रूरतों आदि के वर्णन के साथ संबध्द विस्तृत दस्तावेज़
- सिफारिशों को राज्य सरकारों, समाज और अन्य हितधारकों तक पहुँचाना
- प्रधानमंत्री कार्यालय के तत्वाधान में सिफारिशों पर अमल शुरू कराना
- हितधारकों की राय के आधार पर सिफारिशें तय करना और प्रस्तावों में तालमेल तथा उन पर अमल पर नज़र रखना
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