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राष्ट्रीय ज्ञान आयोग का परिचय
कोई भी राष्ट्र अपनी ज्ञान की पूंजी कैसे बनाता है और उसका कैसे उपयोग करता है उसके आधार पर यह तय होता है कि वह मानवीय क्षमताओं को बढ़ाने में अपने नागरिकों को सशक्त और समर्थ बनाने में कितना सक्षम है। अगले कुछ दशकों में दुनिया में युवाओं की सबसे बड़ी आबादी भारत में होगी। विकास की ज्ञान आधारित रणनीति अपनाने से इस युवा ऊर्जा का लाभ उठाने में मदद मिलेगी। भारत के प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह के शब्दों में, 'अब समय आ गया है कि संस्थाओं के निर्माण का दूसरा दौर शुरू किया जाए और शिक्षा, अनुसंधान और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल की जाए ताकि हम 21वीं शताब्दी के लिए अधिक ढंग से तैयार हो सके।'
इसी विशाल कार्य को ध्यान में रखते हुए 13 जून, 2005 को 2 अक्तूबर, 2005 से 2 अक्तूबर 2008 तक तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए राष्ट्रीय ज्ञान आयोग का गठन किया गया। भारत के प्रधानमंत्री की उच्चस्तरीय सलाहकार संस्था के रूप में राष्ट्रीय ज्ञान आयोग को नीतिगत मार्गदर्शन तथा सुधारों के निर्देशन का अधिकार सौंपा गया है। उसे शिक्षा, विज्ञान और टैक्नॉलॉजी, कृषि,उद्योग, ई-प्रशासन जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित करना है। ज्ञान की सहज सुलभता, ज्ञान प्रणालियों की रचना और संरक्षण, ज्ञान का प्रसार और बेहतर ज्ञान सेवाओं का विकास आयोग के मुख्य सरोकार है।
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